सुशांत केस पर तीन महीने से रोने वाले मीडिया,42,480 किसानों-मजदूरों की आत्महत्या पर चुप क्यों?

तीन महीने से लगातार सुशांत केस पर डिबेट करने वाले गोदी मीडिया किसानों की आत्म हत्या पर पूरी तरह से चुप बैठा है क्योंकि गोपी वीडियो सरकार के खिलाफ आवाज उठा ही नहीं सकती देखिए इस रिपोर्ट में

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCIB) के आंकड़े के अनुसार सन 2019 में 42,480 किशन मजदूर मिडिल क्लास लोग आत्महत्या करने पर मजबूर किया गया या उनको होना पड़ा.

एक किसान जो खेत में दिन रात मेहनत कर पूरे देश को अनाज पैदा कर देता है व खाना खिलाता है लेकिन वही किसान अपने ही देश में आत्महत्या करने पर मजबूर है.

क्योंकि सरकारी नौकरी जैसे टीचर की सैलरी में लगभग 200 गुना से अधिक वृद्धि हुई 70 सालों में लेकिन वही किसान जो पूरे देश को खाना खिला रहे हैं उसके अनाजों की बेचने पर बहुत ही कम वृद्धि हुआ.

जिससे किसान अपने ही खेतों की फसल को सही तरीके से उपजा नहीं पाते बीच में कई प्रकार की विपत्ति आती है जिसमें प्रकृति बाढ़ के कारण से किसान बहुत ज्यादा परेशान रहता है ऐसी हालातों में किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाता है.

2019 में भारत के 42,480 किसानों और दिहाड़ी मजदूरों ने खुदकुशी की. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ने ये आंकड़ा जारी किया है. इकोनॉमिक टाइम ने बताया ​है कि पिछले साल के मुकाबले इसमें 6 फीसदी की वृद्धि हुई है.

NCBI के मुताबिक 2019 में कृषि क्षेत्र से जुड़े 10,281 लोगों ने आत्महत्या की, जिसमें 5,957 किसान तथा 4,324 खेतिहर मजदूर शामिल थे.

तालाबंदी के दौरान जीडीपी में -23.9 फ़ीसदी की गिरावट आई वही कृषि क्षेत्र में 3 फ़ीसदी से ज्यादा कि बढ़ोतरी देखने को मिली भारत सरकार द्वारा यह दर्शाया गया कि कृषि क्षेत्र की है जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी बना हुआ है बाकी सेक्टर तो पूरी तरीके से टूट चुका है।

सुशांत केस के मामले में लगातार डिबेट करने वाले गोदी वीडियो किसानों की दिन पर दिन हालात खराब होते जा रहे हैं लेकिन मीडिया में ऐसी कोई चर्चा नहीं हो रही है नेता अपनी छवि चमकाने के लिए मीडिया को मसाले दिखाने को बोल रहे हैं

जनता दिन पहले परेशान हो रही है बेरोजगारी का मार ऐसा परा है देश की जनता पर लोगों की घर की हालात खराब हो चुकी है किसान रोड पर प्रदर्शन कर रहे है बेरोजगार भी रोड पर ही प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन सरकार असल मुद्दों से देश की जनता को गुमराह करो वह चीजें दिखा रही है जो कि देश को उसकी कोई जरूरत नहीं और असल मुद्दे पर कोई चर्चा ही नहीं की जा रही है।

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