“वर्दी तेरे बाप की दी हुई नहीं है” BJP मंत्री के बेटे से बोली कॉन्स्टेबल सुनीता, छोड़ी पुलिस की नौकरी

रात के समय मंत्रीजी श्री कुमार कानानी का बेटा बाप की गाड़ी लेकर सड़कों पर घूमते हुवे कोविड-19 के प्रतिबंधात्मक हुक्मों को तोड़ रहा था। कर्तव्यनिष्ठ लेडी कॉन्स्टेबल ने उसे रोका तो बदतमीजी पर उतर आया। बाप के मंत्रिपद के नशे में लेडी कॉन्स्टेबल को 365 दिन वहीं खड़े होने की सजा की बात करने लगा। लेडी कॉन्स्टेबल ने साफ बोल दिया कि, वर्दी कानून की है, तेरे बाप की दी हुई नहीं है। जिस पर कानूनन कार्यवाही की गई।

कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लगाया लॉकडाउन अब काफी हद तक हट चुका है, लेकिन अभी भी कुछ पाबंदियां देशभर में लागू हैं. वहीं कई राज्यों ने अपने सबसे प्रभावित इलाकों में पाबंदियों को सख्त किया है. कुछ ऐसा ही है गुजरात के सूरत में जहां, रात के वक्त कर्फ्यू है और उसे सही से लागू करने के लिए पुलिसकर्मी अपनी ओर से प्रयास कर रहे हैं, लेकिन एक ऐसा मामला आया है, जहां राज्य सरकार के एक मंत्री के समर्थकों ने ही उसका उल्लंघन किया और उन्हें ऐसा करने पर टोकने वाली पुलिसकर्मी को इस्तीफा देना पड़ गया.

कर्फ्यू के वक्त बिना मास्क लगाए घूम रहे थे समर्थक

गुजरात का सूरत राज्य में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में से है. यहां लगातार मामले बढ़ रहे हैं और इसे देखते हुए ही जिले में ज्यादा सख्ती है. हालांकि इसका असर कुछ लोगों पर नहीं दिखा और ऐसे कुछ लोगों में शामिल हैं राज्य सरकार के स्वास्थ्य राज्यमंत्री कुमार कानानी के समर्थक.

रिपोर्ट्स के मुताबिक शुक्रवार देर रात सूरत के वराछा इलाके में मंत्री के कुछ समर्थक सरकारी नियमों और दिशानिर्देशों का खुलेआम उल्लंघन करते दिखे. ये लोग कर्फ्यू के बावजूद बिना मास्क लगाए घूम रहे थे.

इस दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी सुनीता यादव ने इन लोगों को इस तरह बाहर घूमने पर टोका. पुलिसकर्मी ने इन समर्थकों से कई सवाल पूछे, जिससे खफा इन समर्थकों ने मंत्री के बेटे को फोन कर बुला दिया.

सीनियर अधिकारी ने दिया घर जाने का आदेश

पुलिसकर्मी ने इसके बावजूद अपने सीनियर अधिकारी को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी, लेकिन राज्य मंत्री का नाम आते ही अधिकारी ने उस पुलिसकर्मी को घर जाने का आदेश दिया और उन्हें वापस अपने घर जाना पड़ा.

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस घटना के बाद सुनीता यादव ने पुलिस सेवा को छोड़ने का फैसला किया और इस्तीफा दे दिया. इस मामले के सामने आने के बाद सूरत के कमिश्नर ने जांच के आदेश दे दिए हैं.

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