बलात्कार की वह संस्कृति जिसे आप सिंच रहे हैं! क्योंकि बलात्कारी के समर्थन में निकालते हैं तिरंगा रैली?

“आप हमारे कूल्हे छुएं या स्तन, या फिर हमारी जांघें…हम बुरा नहीं मानेंगे. आपको चाहे जो पसंद हो, हम आपको सलाह देते हैं कि नैंडोज़ के हर खाने का लुत्फ़ अपने हाथों से उठाएं.” ये नैंडोज़ चिकन का एक विज्ञापन है, जो दो साल पहले भारत के कई अख़बारों में छपा था.

एक ऐशट्रे यानी सिगरेट की राख झाड़ने वाली ट्रे है, जो देखने में कुछ ऐसी है जैसे एक नग्न महिला टब में टांगें फैलाए लेटी हो. ये अमेज़न इंडिया की वेबसाइट पर छपे ऐश ट्रे का विज्ञापन है जो पिछले साल जून में उसकी वेबसाइट पर आया था.

इन दोनों खबरों का जिक्र यहां क्यों किया यह आपको आगे पता चल जाएगा. अब सवाल ये है कि क्या हम एक समाज के तौर पर बलात्कारयों के साथ खड़े हैं? क्या हम व्यक्तिगत तौर पर कहीं न कहीं बलात्कारियों से सहानुभूति रखते हैं? क्या हम बलात्कार का दोष किसी न किसी तरीके से पीड़िता पर डालने की कोशिश करते हैं? इन सारे सवालों का जवाब है- हां.

‘रेप कल्चर’ यानी ‘बलात्कार की संस्कृति’ दुनिया के तक़रीबन हर हिस्से और हर समाज मेंकिसी न किसी रूप में मौजूद है. ये शब्द सुनने में अजीब लगेंगे क्योंकि संस्कृति या कल्चर को आम तौर पर पवित्र और सकारात्मक संदर्भ में देखा जाता है. लेकिन संस्कृति या कल्चर सिर्फ़ ख़ूबसूरत, रंग-बिरंगी और अलग-अलग तरह की परंपराओं और रीति-रिवाजों का नाम नहीं है. संस्कृति में वो मानसिकता और चलन भी शामिल है जो समाज के एक तबके को दबाने और दूसरे को आगे करने की कोशिश करते हैं. संस्कृति में बलात्कार की संस्कृति भी छिपी होती है जिसका सूक्ष्म रूप कई बार हमारी नज़रों से बचकर निकल जाता है और कई बार इसका भद्दा रूप खुलकर हमारे सामने आता है.

‘रेप कल्चर’ का मतलब उस सामाजिक व्यवस्था से है जिसमें लोग बलात्कार का शिकार होने वाली महिला का साथ देने के बजाय किसी न किसी तरीके से बलात्कारी के समर्थन में खड़े हो जाते हैं. ‘रेप कल्चर’ का मतलब उस परंपरा से है जिसमें औरत को ही बलात्कार के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाता है.

किसी समाज में या देश में ‘रेप कल्चर’ मौजूद है, ये साबित करना ज़्यादा मुश्किल नहीं है. अगर भारत की बात करें तो ऊपरी तौर पर लग सकता है कि हम सब बलात्कार के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं, बलात्कारियों को सज़ा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं, औरतों के सम्मान और सुरक्षा के लिए लड़ रहे हैं…वगैरह-वगैरह.

इन बातों को पूरी तरह झुठलाया नहीं जा सकता लेकिन इनका दूसरा पक्ष भी है जो इनसे कहीं ज़्यादा मज़बूत है. ये वो पक्ष है जो साबित करता है कि हम भी कहीं न कहीं बलात्कारियों के समर्थन में खड़े हैं और ‘बलात्कार की संस्कृति’ को सींचकर उसे ज़िदा रखने का अपराध कर रहे हैं.

इसका ताज़ा उदाहरण है कठुआ गैंगरेप मामला, जब अभियुक्तों के समर्थन में खुलेआम तिरंगा लहराया गया और नारे लगाए गए.

बलात्कार का सामान्यीकरण (नॉर्मलाइज़ेशन)

● अब लड़कों की सोच तो नहीं बदल सकते ना? (Men Will be Men)

● भाई की बराबरी करने की कोशिश मत करो. अपनी सेफ़्टी के लिए ही सही, आठ बजे तक घर लौट आओ. (लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग नियम)

● तुम अकेली लड़की नहीं हो जिसके साथ हुआ है, छोटी सी बात को इतना तूल मत दो.

● मीडिया में बलात्कार के बजाय ‘छेड़खानी’ और ‘यौन दुर्व्यवहार’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके अपराध की गंभीरता को कम करने की कोशिश करना.

● फिल्मों, गानों और पॉप कल्चर में स्टॉकिंग, छेड़खानी और लड़की के साथ ज़बरदस्ती को रोमांटिक (सामान्य) बताना और महिलाओं के शरीर को ‘सेक्स की वस्तु’ की तरह पेश करना.

पीड़िता को ही दोषी बना देना

● उसने छोटे/वेस्टर्न कपड़े पहन रखे थे.

● वो देर रात बाहर घूम रही थी.

● वो शराब पीकर लड़के के साथ थी.

● वो सेक्शुअली ऐक्टिव है, उसके कई बॉयफ़्रेंड्स रहे हैं.

● वो लड़कों से हंस-हंसकर बात करती है. ज़्यादा ही फ़्रेंडली होती है.

● वो लड़कों के साथ पब में गई थी. उसने ज़रूर कोई ‘सिग्नल’ दिया होगा.

पीड़िता पर शक करना

● वो दोनों तो रिलेशनशिप में थे, फिर रेप कैसा? (सहमति/कंसेंट को न समझना)

● पति कैसे पत्नी का रेप कर सकता है? शादी हुई है तो सेक्स करेगा ही ना! (मैरिटल रेप/वैवाहिक बलात्कार को नकारना, औरत की मर्ज़ी को अहमियत न देना)

● वो इतनी बदसूरत/बूढ़ी/मोटी है. उसके साथ कौन रेप करेगा? (बलात्कार को औरत के शरीर, चेहरे और उम्र से जोड़कर देखना)

● उसके शरीर पर चोट के निशान नहीं हैं, उससे रेसिस्ट क्यों नहीं किया?

● उसने उस वक़्त शिक़ायत क्यों नहीं की? अब क्यों बोल रही है?

● वो पहले भी एक शख़्स के ख़िलाफ़ शिक़ायत कर चुकी है. उसी के साथ ऐसा क्यों होता है?

लॉकर रूम टॉक

● “भाई…उस लड़की को देखा, मैं तो एक रात के लिए भी उसके साथ चला जाऊं.”

● “यार, उसका फ़िगर देखा? मौका मिले तो मैं तो **** (आगे की बातचीत आपत्तिजनक भाषा की वजह से यहां नहीं लिखी जा सकती)

कुछ ऐसा ही होता है पुरुषों का लॉकर रूम टॉक. जैसा कि नाम से ही साफ़ है, लॉकर रूम टॉक यानी बंद कमरे में होने वाली आपसी बातचीत. जेंडर स्टडी में लॉकर रूम टॉक का आशय पुरुषों की उस आपत्तिजनक बातचीत से है जो वो महिलाओं के सामने अमूमन नहीं करते. ये वो बातचीत है जिसमें पुरुष खुलकर महिलाओं को नीचा दिखाते हैं, उनके लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं और वो सारी बातें कहते हैं जो वे सार्वजनिक तौर पर कहने से बचते हैं.

ताक़तवर लोगों की असंवेदनशीलता

● निर्भया गैंगरेप मामले में अभियुक्तों के वकील एपी सिंह ने कहा था, “अगर मेरी बेटी या बहन शादी से पहले किसी के साथ संबंध रखती है या ऐसा कोई काम करती है जिससे उसके चरित्र पर आंच आती है तो मैं उसे अपने फ़ार्महाउस ले जाकर पेट्रोल छिड़ककर पूरे परिवार के सामने जला दूंगा.”

● हाल ही में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा था कि पहले लड़के-लड़कियां साथ घूमते हैं और फिर कुछ अनबन हो तो बलात्कार का आरोप लगा दिया जाता.

● भारत की संसद में स्टॉकिंग पर चर्चा के दौरान कुछ सांसद हंसते और इस पर कहकहे लगाते देखे गए.

● बलात्कार के एक मामले में आयरलैंड की अदालत में सुनवाई के दौरान वकील ने लड़की का अंडरवियर दिखाया और कहा कि उसने ‘लेस वाली थॉन्ग’ पहन रखी थी इसलिए शायद वो लड़के के साथ सहमति से सेक्स करना चाहती थी.

● फ़िलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो डुटार्टे भी महिलाओं के बारे में एक से बढ़कर आपत्तिजनक बयान देते रहते हैं. कुछ महीने पहले ही उन्होंने कहा था कि दुनिया में जब तक ख़ूबसूरत महिलाएं रहेंगी, बलात्कार होते रहेंगे.

क्या आप भी रेप कल्चर का हिस्सा हैं?

रेप कल्चर सिर्फ़ भारत में ही मौजूद है, ऐसा बिल्कुल नहीं है. रेप कल्चर को ज़िंदा रखने में सिर्फ़ पुरुषों की हैं, ऐसा भी नहीं है. इसमें महिलाओं की भागीदारी भी है.

अगर आपको लगता है नैंडोज़ चिकन के उस विज्ञापन में कुछ ग़लत नहीं है जिसमें मुर्गियां लोगों को उनके स्तन और कूल्हे छूने को आमंत्रित कर रही थीं, तो आप भी रेप कल्चर का हिस्सा हैं.

अगर आपको उस ऐश ट्रे में कुछ ग़लत नहीं लगता जिसमें लोगों को महिला की योनि में सिगरेट की राख छाड़ने के लिए उकसया जा रहा था, तो रेप कल्चर के फलने-फूलने के पीछे आपका भी हाथ है.

अगर आप निर्भया के बलात्कारियों के वकील की उस दलील से सहमत हैं कि हमारा कल्चर इसलिए बेस्ट है क्योंकि यहां लड़कियां 7 बजे के बाद घर के बाहर नहीं जातीं तो आप बेहद असंवदेनशील हैं और बलात्कार की संस्कृति को बनाए रखने में पूरी भागीदारी निभा रहे हैं.

कठुआ रेप केस को जब भी याद किया जाएगा तो इसकी कई तस्वीरें जहन में आएंगी. ये वो मामला था जिसने जम्मू-कश्मीर समेत पूरे देश को रुलाया, आम आदमी से लेकर बॉलीवुड का सुपरस्टार बच्ची को इंसाफ दिलाने के लिए सामने आया. लेकिन इस घटना के साथ कुछ ऐसा भी जुड़ा है जो आजतक कभी नहीं हुआ. इस मामले में जिन लोगों का नाम सामने आया था, उनके समर्थन में स्थानीय लोगों ने एक तिरंगा यात्रा निकाली थी.

अगर आप #MeToo मुहिम की शुरुआत करने वाली टैराना बर्क का ये कहकर मज़ाक उड़ाते हैं कि वो कितनी बदसूरत हैं और उनका यौन शोषण कौन करेगा…तो दोस्त, आप ही इस बलात्कार की संस्कृति को सींच रहे हैं.

अब बात बॉयज लॉकर रूम के बारे में

दरअसल सोमवार सुबह #boyslockerroom ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा था. जिसमें इस ग्रुप के कई चैट्स के स्क्रीनशॉट तक शेयर किए जा रहे थे. आपतो बता दें boys locker room इंस्टाग्राम पर बनाए गए एक अकाउंट का नाम है. इसपर कुछ स्कूली छात्र न केवल अश्लील चैट कर रहे थे, बल्कि वे इस ग्रुप में लड़कियों की तस्वीर डालकर सामूहिक दुष्कर्म करने की बात तक कर रहे थे. एक ट्वीटर यूजर ने ग्रुप के स्क्रीन शॉट लेकर सोशल मीडिया पर डाल दिए, जिसके बाद इस पूरे मामले का पता चला. सोशल मीडिया से लिए गए बॉयज लॉकर रूम ग्रुप के कुछ स्क्रीनशॉट

एक रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में दिल्ली पुलिस ने कहा कि इंस्टाग्राम पर बनाए गए स्कूली छात्रों के इस ग्रुप में छात्र छोटी लड़कियों की तस्वीरें बांट रहे हैं. इतना ही नहीं, उनके द्वारा अश्लील बातें की जा रही हैं और आपत्तिनजक शब्दों तक का इसमें इस्तेमाल किया गया. चौंकाने वाली बात यह है कि इस ग्रुप से जुड़े अधिकतर छात्र स्कूलों में पढ़ते हैं. डीसीपी अन्येश राय ने बताया कि स्वत: संज्ञान लेकर मामला दर्ज किया गया है। साइबर सेल मामले की जांच कर रहा है. इसके साथ ही इंस्टाग्राम को पत्र लिखकर इस ग्रुप से जुड़ी सभी जानकारी मांगी गई है. इंस्टाग्राम से मिली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में धारा 465 (जालसाजी), 471 (वास्तविक जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के रूप में उपयोग), 469 (प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए जालसाजी) के तहत मामला दर्ज किया है. इसके अलावा 509 (शब्द, इशारा या कार्य) धारा 67 (इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री को प्रकाशित करना या प्रसारित करना) और आईटी अधिनियम की धारा 67A (इलेक्ट्रॉनिक रूप में यौन स्पष्ट अधिनियम वाली सामग्री का प्रकाशन या प्रसारण) के तहत मामला दर्ज किया है.

Credit: Sindhuvashini & Satish Rana

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