SAUDI ARAB TAKE DECISION ABOUT MOSCOW SPEAKER :सऊदी अरब इस समय बदलाव के दौर से गुजर रहा है। वही वहां की मस्जिदों से नमाज के लिए लाउडस्पीकर के जरिये सुनाई देने वाली आवाज को धीमा करने का फरमान भी जारी हो गया है। दुनिया के इस सबसे अधिक रुतबे वाले देश सऊदी अरब में कट्टरता की निशानियों को खत्म करते हुए सुधारवादी कदम उठाने की मुहिम चल रही है। जबकि वहां के मस्जिदों से लाउडस्पीकरों की आवाज को कम करने का फैसला भी उनमें से एक है।

बता दे कि सऊदी अरब ने बीते वर्षो में महिलाओं को सार्वजनिक जीवन के कई सारे अधिकार दिए हैं। वही इनमें महिलाओ को ड्राइविंग का अधिकार, स्टेडियम में जाकर पुरुषों के खेल देखने का अधिकार और साथ ही गीत-संगीत के कार्यक्रमों में शिरकत जैसे अधिकार शामिल हैं। आप सभी को बता दे कि सऊदी अरब को इस्लामी जगत में सबसे पवित्र देश माना जाता है क्योंकि वहां पर सबसे अधिक महत्व वाले धार्मिक स्थल हैं। इसके साथ ही आपको बता दें कि वहीं पर पैगंबर का भी जन्म हुआ और साथ ही वहीं उन्होंने ज्यादातर वक्त गुजारा।

वही सऊदी अरब मुस्लिमों की कट्टरपंथी वहाबी सोच वाला देश माना जाता है, जहां पर महिलाओं और साथ ही पुरुषों के लिए इस्लाम धर्म से जुड़े काफी सख्त कानून भी लागू हैं। तमाम विद्वान मुस्लिम कट्टरता के लिए वहाबी सोच को जिम्मेदार मानते हैं। इस्लामी आतंकवाद के लिए भी यही सोच जिम्मेदार मानी जाती है। सऊदी अरब इसी धार्मिक कट्टरता को त्यागने की राह पर आगे बढ़ रहा है। तेल संपन्न यह देश अब उदारीकरण की राह पर चलते हुए अपनी नई पहचान बनाना चाहता है। बदलाव का यह रास्ता क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में तय किया जा रहा है।

मस्जिद में लगे लाउडस्पीकर पर दिए जाने वाले धार्मिक उपदेशों का समय किया जाए कम

बता दे कि सऊदी सरकार ने मई में एक आदेश जारी किया था जिसमें सभी मस्जिदों को अपने लाउडस्पीकरों की आवाज कम करने के लिए कहा है। कहा है कि लाउडस्पीकर की आवाज केवल उनकी अधिकतम सीमा की एक तिहाई ही रखी जाए। साथ ही लाउडस्पीकर पर दिए जाने वाले धार्मिक उपदेशों का भी समय पहेले से कम किया जाए। सरकार ने ऐसा देश में बढ़ते हुए ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए किया है।

वही सऊदी अरब के शहरों-कस्बों में काफी अधिक संख्या में मस्जिदें हैं। इन मस्जिदों में लाउडस्पीकर भी लगे हुए हैं। अजान के वक्त और साथ ही बाकी के समय इनसे उठने वाली आवाज वातावरण में भारी शोर पैदा करती है। इसका दुष्प्रभाव मस्जिदों के आसपास रहने वाले लोगों पर महसूस किया गया है। इसके चलते वहां पर कुछ मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटवाने की मांग भी उठी हैं।

इसके साथ ही सऊदी अरब में रेस्टोरेंटों में बजने वाले संगीत पर भी रोक लगाने की मांग उठी है। कई शहरों में जायरीनों की आमद-रफ्त के चलते काफी अधिक संख्या में रेस्टोरेंट हैं। इन रेस्टोरेंट में संगीत बजाए जाने को लेकर अक्सर विरोध जताया जाता है। सुधार की प्रक्रिया में इन रेस्टोरेंट से उठने वाली आवाज के लिए भी बेहद जल्द ही सीमा तय होने की उम्मीद है।