रुचि सोया घोटाला: देशभक्ति के नाम पर बाबा जी का फर्जीवाड़ा SBI को लगाया करोड़ों रुपए का चूना ?

कानून की आड़ लेकर लोगों की गाढ़ी कमाई लूट ली, वो भी इतनी भयंकर लूट, जो अंग्रेजों ने भी नही की होगी और ना 200 साल के राज में कार्ज पाए होंगे जितना कि भगवा चोला ओढ़ एक “तथाकथित” सन्यासी ने किया क्या बीतेगी आपपर जब आपके मेहनत की, खून पसीने की गाढ़ी कमाई के एक लाख रुपए को किसी कानून कि आड़ लेकर मात्र एक हजार कर दी जाए ?? क्यों, पुराने फिल्मों के सीन याद आ रहे क्या एक मक्कार साहूकार, चंद मुट्ठी अनाज का कर्ज और मुट्ठी बार अनाज का कर्ज चुकाते चुकाते कई पीढियां बंधुआ मजदूर??? क्यों ऐसा ही कुछ याद आ रहा होगा न ??

SBI बैंक- रूचि सोया – रामदेव घोटाला

रूचि सोया की हालात दिवालिया होने की थी। साल 2019-20 में SBI का उसपे कुल 1,816 करोड़ का लोंन था। दिवालिया क़ानून के तहत SBI ने निर्णय लिया कि 1, 816 की बजाय 883 करोड़ वसूलेगा। लेकिन बैंक ने एक भी रुपया नहीं वसूला और रूचि सोया के बट्टे खाते में 746 करोड़ लिख दिया (मतलब कंपनी पैसा चुकाने की हालत में नहीं है, हाथ खड़े कर चुकी है)।

रामदेव की पतंजलि को इसी रूचि सोया को खरीदने के लिए इसी SBI ने 1200 करोड़ रुपये दिए हैँ। ध्यान दीजिये रूचि सोया पहले से ही घाटे में है, बैंक का 1, 816 करोड़ नहीं चुका पा रही। फिर ये मेहेरबानी क्योँ वो भी सरकारी बैंक द्वारा जिसका SBI पहले ही 1,070 करोड़ माफ़ कर चुकी है।

घोटाले का गेम समझिये :

सहारा की रूचि सोया SBI से बड़ा लोंन लेती है और कंपनी दुनियां की टॉप 250 कंज्यूमर प्रोडक्ट्स में 175 नंबर पे आ जाती है। कंपनी घाटा दिखाती है और बैंक का लोंन भी नही चुकाती है। बैंक 1070 करोड़ माफ़ करके बचा 746 करोड़ लोन बट्टे खाते में डाल देती है। इस से कंपनी की टोटल कीमत (नेट वर्थ ) गिर जाती है और शेयर्स की कीमत भी 10 रुपये पे आ जाती है। बाबा राम देव उसी SBI से लोन लेके औने पौने दामों में रूचि सोया खरीद लेते हैँ। पतंजलि का नाम जुड़ते ही शेयर वेल्यू 10 रुपये से बढ़ के 110 तक जाते हैँ। नये शेयर से पतंजलि बैंक का पैसा भी चुका देगा और नया लोन भी। बैंक बट्टे खाते को माफ़ कर देगा जिस से बेलेंस शीट भी अच्छी दिखने लगेगी। सब का फायदा फिर नुकसान किसका ?

बैंक का जो पैसा डूबा है वो कहाँ से आएगा ? 2019 रिपोर्ट के अनुसार बैंको ने मिनिमम बेलेंस ना रखने के लिए पेनल्टी में गरीब जनता से 10 हज़ार करोड़ कमाया था। इसी SBI बैंक ने अपने असली काम से साल 2017-18 में मात्र 862 करोड़ कमाया लेकिन बेलेंस पेनल्टी के माध्यम से 2,400 करोड़ कमाया था। गौरतलब बात है कि जो 2000 का मिनिमम बेलेंस नही रखा पाया वो कोई गरीब ही होगा। जब बैंक उधोगपतियों को लोन देके माफ़ करते हैँ तब वो पैसा गरीब खाता धारकों से पासबुक एंट्री, एटीएम में 4 से अधिक विड्रॉल, नयी पासबुक चार्ज जैसे फालतू चार्ज लगा के वसूला जाता है।

इस सरकार में ख़ूब भ्रष्टाचार हो रहा है, लेकिन क़ानून बना के, ना जाँच करवा सकते हैँ ना पकड़ सकते हैँ।

(यह लेख लक्ष्मी प्रताप सिंह के फेसबुक वॉल से लिया गया है यह लेखक के अपने विचार हैं)

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