SBI समेत इन 6 सरकारी बैंकों को प्राइवेट हाथों में सौपने की तैयारी पूरी, बिकेगी 51% हिस्सेदारी

केंद्र की मोदी सरकार अगले एक साल में देश के 6 बड़े बैंकों में अपनी हिस्सेदारी को 51 फीसदी तक लाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक ने केंद्र सरकार को अगले 12 से 18 महीनों में इन बैंकों की हिस्सेदारी बेचने का सुझाव दिया है।


विनिवेश की प्रक्रिया को तेजी से अंजाम देने में जुटी मोदी सरकार का यह अहम कदम हो सकता है। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, कैनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया को इसके लिए चुना गया है।

सूत्रों के मुताबिक आरबीआई के सुझाव को केंद्र सरकार ने सकारात्मकता के साथ लिया है और जल्दी ही इसकी प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। 6 बैंकों में अपनी हिस्सेदारी कम करने से केंद्र सरकार को 43,000 करोड़ रुपये की रकम मिल सकती है।


बैंकों के विनिवेश का यह फैसला देश के 6 अहम सरकारी बैंकों के निजीकरण से अलग है। इससे पहले जुलाई में एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सरकार 6 बैंकों के निजीकरण की तैयारी में है। इनमें बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और पंजाब ऐंड सिंध बैंक शामिल हैं।


प्रस्ताव के मुताबिक इन बैंकों की बड़ी हिस्सेदारी सरकार बेचने की तैयारी में है। ऐसा करने पर ये बैंक निजी हाथों में चलाएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक मोदी सरकार देश में सिर्फ 4 या 5 सरकारी बैंक ही बनाए रखने के मूड में हैं। हालांकि इन रिपोर्ट्स को लेकर केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।

बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक और कई सरकारी समितियां देश में सिर्फ 5 सरकारी बैंकों को ही बनाए रखने की सिफारिश कर चुकी हैं। एक सरकारी बैंक के सीनियर अफसर ने भी सरकार के प्लान को लेकर कहा, ‘सरकार पहले ही कह चुकी है कि अब बैंकों का विलय नहीं होगा। ऐसे में अब हिस्सेदारी बेचने का ही विकल्प बचता है।’


इससे पहले 1 अप्रैल को ही सरकार ने 10 बैंकों का विलय करते हुए उन्हें 4 बैंकों में तब्दील कर दिया था। फिलहाल देश में कुल 12 सरकारी बैंक मौजूद हैं, जिनकी 3 साल पहले 2017 में 27 संख्या थी।

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