इस हकीकत से भाग नहीं सकते कि इस लॉक डॉन में लोग भूखे नहीं है बिल्कुल है आप भोजपुर के आरा की घटना कटिहार जंक्शन की घटना और गुरु ग्राम की घटना को झुठला नहीं सकते| ऐसे ना जाने कितने परिवार हैं जो कि एक वक्त की रोटी के लिए तरस रहे है|

रेल मंत्री पीयूष गोयल उन्होंने टाइम्स स्कूल ऑफ मैनेजमेंट ऑफ द बैनेट यूनिवर्सिटी कोविड-19, जान भी जहान भी पर वैश्विक ऑनलाइन सम्मेलन में अपने मुख्य भाषण में कहा 3 महीने गुजर गए हैं और एक भी व्यक्ति भूखा नहीं है यह सिर्फ केंद्र या राज्य सरकारों का प्रयास नहीं है या 130 करोड़ भारतीयों का प्रयास है|

औरंगाबाद जाते मज़दूर ट्रेन की पटरी पर सोते हुए ही कट गए और अपने पीछे बिखरी रोटियों को ही छोड़ गए. वो छोड़ गए थे एक भयभीत करने वाली सच्चाई, भूख के लिए की जाने वाली जद्दोजहद. लॉकडाउन में भूख, बेबसी और लाचारी की तस्वीरों ने पूरे देश का दिल झकझोर कर रख दिया था उसे कौन भूल पाएगा.

तो आपको बता दूं रेल मंत्री सरासर झूठ कह रहे हैं, द वायर के रिपोर्ट के मुताबिक बिहार के भोजपुर जिले के आरा की है मूसाहर समुदाय से आने वाले 8 वर्षीय राकेश की मौत 26 मार्च को हो गई थी| उनकी मां का कहना है कि लोग डाउन के चलते उनके पति का मजदूरी का काम बंद था जिसके चलते 24 मार्च के बाद उनके घर खाना नहीं बना था और उनकी मौत हो गई| और यह सिर्फ एक घर की घटना नहीं है ऐसे कई लोग हैं जिनकी भूख से मौत हो गई|

द वायर के मुताबिक भूख से हुई थी बच्चे की मौत

इससे पहले गुरुग्राम में एक युवक ने आत्महत्या कर ली थी क्योंकि उनके लॉक डाउन की वजह से उनका काम बंद हो गया| इनकी वजह से उनको आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा था कुछ दिन तो वह पास की दुकान से उधार लेकर अपना घर चला रहे थे फिर दुकान वाले ने राशन देने से मना कर दिया जिसकी वजह से उन्हें अपना फोन बेचना पड़ा फोन के पैसे से जब तक घर चला चला लिए उनके बाद पैसे खत्म हुए तो उन्होंने आत्महत्या कर ली|

वही भूख को लेकर एक ऐसा ही वीडियो सोशल मीडिया पर फिर वायरल हुआ है, जिसमें खाने के लिए लोग एक-दूसरे से लड़ाई पर उतर आये. नरेन्द्र नाथ नाम के एक ट्विटर यूज़र ने एक वीडियो शेयर किया है. इसमें रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए रखे बिस्कुट को लेकर लोग एक-दूसरे से छीना-झपटी कर रहे हैं.

इस पर फराह खान अली (Farah Khan Ali) ने पीयूष गोयल (Piyush Goyal) के बयान का जवाब देते हुए लिखा, “यह सच नहीं है सर. ऐसे बहुत से लोग हैं, जिनका मैंने व्यक्तिगत रूप से सामना किया है, जो भूखे मर रहे हैं और मैंने अपनी व्यक्तिगत क्षमता से मदद की है और अभी भी कर रही हूं.” बता दें कि पीयूष गोयल ने अपने बयान में कहा कि हमने तीन महीने गुजारे हैं और एक भी व्यक्ति भूखा नहीं है. यह केवल राज्य और केंद्र सरकार के प्रयासों का नतीजा नहीं है. यह करीब 130 करोड़ भारतीयों की मेहनत है.

इस हकीकत से भाग नहीं सकते कि इस लॉक डॉन में लोग भूखे नहीं है बिल्कुल है आप भोजपुर के आरा की घटना कटिहार जंक्शन की घटना और गुरु ग्राम की घटना को झुठला नहीं सकते| ऐसे ना जाने कितने परिवार हैं जो कि एक वक्त की रोटी के लिए तरस रहे है|

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