टोक्यो जैसा सपना देखने वाली वाराणसी के क्वारंटाइन सेंटर में लोगों का बुरा हाल

उत्तर प्रदेश में क्वॉरेंटाइन केंद्रों की स्थिति बदतर है ना तो यहां रह रहे लोगों की स्क्रीनिंग की गई और ना ही क्वॉरेंटाइन के नियम पर अमल किया जा रहा, हैरानी की बात तो यह है उनमें से एक वाराणसी का क्वॉरेंटाइन सेंटर भी है वाराणसी नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है.

एक और देश कोरोनावायरस भयानक महामारी से जंग लड़ रहा है वहीं दूसरी और देश की जनता सरकार के झूठे वादों की मार झेल रही है. आसान भाषा में इसे दोहरी मार कर सकते हैं एक कोरोना और दूसरी सरकारी व्यवस्था की. कोरोनावायरस रोकने के लिए भले ही सरकार हर संभव कोशिश कर रही हो, लेकिन जमीन पर उसका खासा असर देखने को नहीं मिल रहा है. आखिर दिखे भी कैसे क्योंकि कोशिश भी तो उसी रफ्तार से ही हो रही है जिस रफ्तार से सरकारी काम होते हैं. दरअसल कोरोना मरीजों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने कई जगहों पर क्वॉरेंटाइन सेंटर बना है लेकिन उस चारदीवारी के अंदर की व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है.

वाराणसी के रोहनिया में क्वारंटाइन सेंटर की स्थिती

उत्तर प्रदेश के इन्हीं क्वॉरेंटाइन सेंटर में से एक के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र और भविष्य में टोक्यो जैसे शहर का सपना देखने वाले वाराणसी यहां बने क्वॉरेंटाइन में लोगों को ठहराया तो जा रहा है लेकिन व्यवस्था ना के बराबर है. एक किस्म से यह मान सकते हैं ऐसा लग रहा है लोग यहां तड़ीपार की सजा काट रहे हैं. यहां दूसरे प्रदेशों के करीब 200 लोगों को ठहराया गया है यहां की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है यहां हर दिन किसी न किसी कारण हंगामा हो ही जाता है, फिर चाहे वह लोगों के सोने की व्यवस्था हो या फिर नहाने आदि की. लोगों के लिए क्या व्यवस्थाएं की गई है इसकी जीती जागती तस्वीर भी है जिसमें साफ देखा जा सकता है कि सरकार ने जिस क्वॉरेंटाइन सेंटर में संदिग्ध मरीजों की सपना देखा था वहां उनके साथ जेल से भी बुरा बर्ताव हो रहा है.

वाराणसी के पिंडरा थाना क्षेत्र के गजोखर स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में बने क्वॉरेंटाइन सेंटर में खाने की गुणवत्ता व घर जाने की मांग को लेकर हंगामा हो गया. सूचना मिलने पर पहुंचे एडीएम प्रशासन रणविजय सिंह व ज्वाइंट मजिस्ट्रेट मणिकंदन, तहसीलदार रामनाथ इंस्पेक्टर अली ने समझा-बुझाकर शांत कराया. यह स्थिति सिर्फ इस क्वारंटीन सेंटर की नहीं है बल्कि ऐसे हालत रोहनिया स्थित एक पब्लिक स्कूल में बने क्वॉरेंटाइन सेंटर की भी है. जहां लोगों को जमीन पर पतला गद्दा डालकर सोने की व्यवस्था की गई है. सरकार की ओर से बिस्तर चारपाई तक का इंतजाम नहीं है. सिर्फ सोने की बात नहीं है बल्कि मौजूद तमाम लोगों का ना तो मास्क दिया गया है और ना ही सैनिटाइजर की व्यवस्था की गई है. हालांकि डीएम कौशल राज शर्मा ने यहां निरीक्षण भी किया मच्छरदानी की शिकायत के बाद कुछ लोगों तक मच्छर वाली अगरबत्ती मुहैया कराने का आश्वासन दिया गया लेकिन यह आश्वासन सिर्फ आश्वासन ही रह गया अब तक यह लोग Corona के साथ-साथ जरूरी चीजों के लिए जंग लड़ रहे हैं.

वाराणसी के रोहनिया में क्वारंटाइन सेंटर पर जमीन पर लेटे लोग

यह हाल सिर्फ वाराणसी का नहीं है बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार के इस राज्य में लगभग हर जगह यही स्थिति है. कई क्वॉरेंटाइन सेंटर में पीने को पानी नहीं है तो कई सेंटर पर सरकारी नौकर दावत का आनंद ले रहे हैं. लेकिन इन सब के बाद भी सरकार की आंखें नहीं खुल रही है उधर प्रदेश सरकार ने सभी तहसीलों को 70-70 लाख रुपए जारी करने की घोषणा की है लेकिन यह मदद अफसरशाही में फंसी दिखती है.

उत्तर प्रदेश सरकार के दावों के उलट क्वॉरेंटाइन सेंटरों की स्थिति है. राज्यों के क्वॉरेंटाइन सेंटरों की स्थिति बदतर है ना तो यहां रह रहे लोगों की स्क्रीनिंग की गई है और ना ही क्वॉरेंटाइन के नियम पर अमल किया जा रहा है. कई क्वॉरेंटाइन सेंटर पर ना तो कोई थाने का चौकीदार है और ना ही स्वस्थ विभाग का कोई कर्मचारी कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए यहां ना तो सैनिटाइजर दिया गया है और ना ही स्क्रीनिंग की गई है कई क्वॉरेंटाइन सेंटर में तो 50 लोगों के लिए सिर्फ तीन या चार वॉशरूम है कुल मिलाकर सब भगवान भरोसे है.

Source: Navjivan

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