तेल के दाम इतने गिर गए हैं कि देश में तीन 3-4 रुपए बिकना चाहिए,? लेकिन लोग हिंदू मुस्लिम में व्यस्त है!

कोरोना महामारी के चलते पूरे विश्व के कई देशों में लॉक डाउन के हालात है इस लॉक डाउन का एक ऐसा भी असर सामने आया है जिसके बारे में कोई कभी सोच भी नहीं सकता था कच्चे तेल के दाम में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है न्यूयॉर्क में कच्चे तेल की कीमत 0.0 1$ प्रति बैरल पहुंच गई है| कच्चे तेल की कीमत अपने पिछले 84 साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंचा है| कंपनियों के पास स्टोरेज तक कम पड़ रहे हैं|

पहली बार तेल की कीमत $1 से भी कम हो गई है यानी तेल बोतल बंद पानी से भी सस्ता हो गया है तेल बाजार में हाहाकार मचा हुआ है तेल रखने के लिए उनके पास स्टोरेज कम पड़ रहे हैं| अमेरिका और कनाडा जैसे देश में तो तेल उत्पादन बंद हो रहा है ओपोक को भी कुएं बंद करने पड़ सकते हैं क्योंकि कच्चे तेल के स्टोरेज की कमी पड़ रही है| अंतरराष्ट्रीय बाजार में जो रेट है उसके हिसाब से देश में 3-4 रुपए प्रति लीटर पेट्रोल डीजल होना चाहिए लेकिन सरकार ऐसा करेगी नहीं क्योंकि pro-people सरकार ही ऐसे निर्णय लेती है|

जब 2013 में मनमोहन सिंह की सरकार थी उस समय कच्चे तेल की कीमतें $125 प्रति बैरल थे तब भारत में पेट्रोल की कीमत ₹70-75 और डीजल ₹66 प्रति लीटर थी और आज $1 प्रति बैरल से भी कम कीमत होने के बावजूद पेट्रोल ₹70 डीजल ₹62 में बिक रहा है| राष्ट्र प्रेमी चुप है क्योंकि महंगा खरीदना शौक बन चुका है लोग अपनी जेब नहीं देख दूसरों का धर्म खोजने में मस्त और व्यस्त हैं| आप इस साधारण गणित से ही सरकारों की प्राथमिकताओं का अंतर समझ सकते हैं अभी हमारे पास तेल स्टोरेज की क्षमता नहीं है अन्यथा भविष्य में बहुत अधिक फायदा होता है चीन ने इस दिशा में बहुत पहले ही कार्य शुरू कर दिया था चीन बड़े स्केल पर तेल का भंडारण कर रहा है किसी भी आपदा और युद्ध जैसे हालात में यह बहुत जरूरी भी होता है यह नेतृत्व की दूरदर्शिता को परिलक्षित करता है|

कच्चे तेल की कीमतों में जो गिरावट आई है उस पर राहुल गांधी ने ट्वीट किया है उन्होंने लिखा कि “दुनिया में कच्चे तेल की क़ीमतें अप्रत्याशित आँकड़ो पे आ गिरी हैं, फिर भी हमारे देश में पेट्रोल ₹69, डीज़ल ₹62 प्रति लीटर क्यों? इस विपदा में जो दाम घटे, सो अच्छा। कब सुनेगी ये सरकार?


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