देश में करोना(Coronavirus) की लड़ाई हर दिन खतरनाक होती जा रही है देश में ना तो नहीं संक्रमित मरीजों की संख्या कम हो रही है और ना ही मौतों का संख्या रुकने का नाम ले रहा है। तो ऐसे में आप सभी लोगों को एक उम्मीद की तलाश है। एक ऐसी दवाई की तलाश है जिससे लोगों के मन में यह विश्वास पैदा हो कि इससे करोना को हराना बहुत ही आसान है। तो वहीं अब ऐसे में लोगों के मन में विश्वास दिलाने और साथ ही करोना को हराने की कोशिश में डीआरडीओ (DRDO) भी जुट गया है डीआरडीओ (DRDO) बोले तो रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन।

तो अब जरा यह जानिए कि आखिर चेन्नई कोशिश है क्या

जानिए कोरोनावायरस (Coronavirus)को हराने का नया प्लान क्या है और क्या है वह दवाई। दरअसल आपको बता दें कि डीआरडीओ (DRDO)की एक लैब इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज ने कोरोनावायरस (Coronavoris)को हराने के लिए के लिए एक दवाई तैयार की है। वही इस दवा को भारत में आपात इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी गई है डीजीसीआई (DGCI) ने इसकी मंजूरी दी है आपको बता दें कि डीआरडीओ (DRDO)के लैब ने इसे डॉक्टर रेडी कि लैब के साथ मिलकर बनाया है। वही दबा के क्लीनिकल ट्राई (Clinical Trials) के नतीजे बताते हैं कि जो दवा इस्तेमाल की जा रही है वह करोना मरीजों को ठीक करने में काफी सक्षम है

और इस दवाई की सबसे बड़ी खासियत यह बताई जा रही है कि यह मरीजों के ऑक्सीजन (Oxygen) की जरूरतों को भी कम करती है जिसकी जरूरत आज के तारीख में सबसे ज्यादा हैं इसके साथ ऐसी दवाई के दम पर कोरोना से संक्रमित लोगों को काफी हद तक ठीक किया गया

वही इस दवाई के बारे में जानने वाले बताते हैं की यह दवाई लेने से कोरोना मरीजों की रिपोर्ट आरटी पीसीआर टेस्ट( RTPCR Test) नेगेटिव आई जिसके बाद से यह अनुमान लगाया जा रहा है क्या दवाई आने वाले दिनों में काफी फायदेमंद साबित हो सकती हैं इस दवाई को लेकर यह भी बताया जा रहा है कि अप्रैल 2020 तक देश में करोना की पहली लहर आई थी उसी दौरान आईआईएमएस डीआरडीओ वैज्ञानिकों ने हैदराबाद के सेंटर फॉर सेल्यूलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी की मदद से कुछ प्रयोग की ओर और धीरे-धीरे जाना कि किस तरह से यह अरु प्रयोगशाला में प्रयोग किए गए और करीब से देखा कि sars-cov-2 वायरस के खिलाफ यह कैसे काम करता है और कोरोना को बढ़ने से रोकता है।

वही इसके प्रभाव को लेकर चर्चा हुई तो डीजीसीआई ने मई 2020 मैं इस दवाई के दूसरे चरण की ट्राई करने की मंजूरी दी वहीं अब इसके मैन्युफैक्चरिंग की जिम्मेदारी हैदराबाद स्थित डॉ रेड्डी लेबोरेटरी को दी गई। वही डीआरडीओ से जुड़ी दवाइयों को लेकर कई बातें कही गई। जैसे कि जब इसका तीसरे चरण का ट्रायल चल रहा था 2 दिसंबर 2020 से लेकर मार्च 2021 तक देशभर में इस अस्पतालों को चुना गया मरीजों को शामिल किया गया बाद मैं नतीजा यह आया कि जिन लोगों को यह दवा दी गई उनमें से 42 फ़ीसदी मरीजों को तीसरे ही दिन ऑक्सीजन पर कम निर्भर होना पड़ा. यानी कि बाहर से ऑक्सीजन की जरूरत कम पडी.

यह दवा काम कैसे करेगी

तो जानिए कि यह दवा काम कैसे करेगी यानी कि मरीज इसे कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं तो जान लीजिए कि यह दबा पाउडर के तौर पर आता है जिसे पानी में खोला जाता है और वह शरीर में जाते ही शरीर के कोशिका मैं जमा हो जाती है इस दवा से अब काफी उम्मीद जग गई और अब यह वैसे ही काम करेगी जैसा की दावा है तो अब आने वाले दिनों में कोरोना की शामत आ जाएगी और साथ ही लोगों को इस महामारी से बचने में काफी मदद मिलेगी