न्यू इंडिया : आधार कार्ड़ नहीं था तो सरकार ने नहीं दी राशन, भूख से चली गयी जान

देश में कोरोना को लेकर हंगामा मचा हुआ लेकर जगह जगह जाँच चल रही है. वही केंद्र सरकार ने लॉक डाउन कर दिया है.

जिससे लोगो के पास खाने पिने की चीज़ें की किल्लत हो गयी है. बंदी से दिहाड़ी मजदूरी करने वाले लोगों पर काफी गहरा असर डाला है. उनके पास खाने पीने का सामन तक नहीं है.

इसको लेकर सरकार ने घर घर तक जाकर लोगों तक राशन पहुंचने का काम कर रही है लेकिन अब झारखण्ड से खबर आ रही है की झारखंड के गढ़वा में एक वृद्ध महिला की भूख से मौत हो गई. सोमरिया देवी 70 बरस की थीं.

सोमरिया देवी पति पत्नी रहते थे. उनके कोई संतान नहीं है. सोमरिया देवी के पति लछु लोहरा का आधार कार्ड नहीं है. इस वजह से उन्हें कोई सरकारी मदद, राशन आदि नहीं मिलता था.

पति का दावा है कि मौत भूख की वजह से हुई है. पंचायत प्रतिनिधि और जिला पार्षद के हवाले से हिंदुस्तान ने लिखा है कि घर में तीन दिन से खाना नहीं बना था. घर में अनाज का एक दाना तक नही था.

चार दिन पहले पड़ोसियों ने खाना खिलाया था. लॉकडाउन के कारण न तो उन्हें कहीं से मदद मिली और न ही वह कहीं जा सके कि कहीं कुछ मांग कर पेट भर लें.

प्रशासन ने भूख से मौत होने से इनकार कर दिया है लेकिन छह हजार रुपये नकद और 50 किलो चावल की तत्काल मदद की है. अगर भूख मुद्दा नहीं था तो चावल क्यों दिया गया. यह भी शायद सरकारी नियम है कि कहीं भी भूख से मौत हो तो पहले इनकार कर दो

हाल में झारखंड में कई मौतें हुई हैं, लेकिन मीडिया और सरकार की ताकत यह साबित करने में खर्च हो रही है कोरोना तो मुसलमान फैला रहे हैं.
भूख से हो रही मौतें राष्ट्रीय शर्म हैं. यह ऐसी क्रूरता है जो लोकतंत्र के साथ हमारे समाज और मानवता पर कालिख पोतती है. लेकिन इस पर कौन बात करे? देश में राइट टू फूड कानून लागू है लेकिन देश के प्रधानमंत्री ट्विटर पर सुर्रा छोड़ रहे हैं कि उनके सम्मान में बालकनी में खड़े होकर ताली बजाओ.

फोटो में सोमरिया देवी के पति हैं.

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