न पैकेज-न प्लान, ना रणनीति? लॉकडाउन के तरीके पर सोनिया गांधी ने मोदी सरकार को घेरा

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने लॉक डाउन पर कुछ सवाल खड़े किए हैं| सोनिया गांधी ने कहा कि 17 मई के बाद क्या? 17 मई के बाद कैसे? मोदी सरकार (Modi Government) के पास लॉकडाउन को लेकर आगे की क्या रणनीति है?

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी की कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक शुरू हो गई है. इस बैठक में कोरोना संकट, लॉकडाउन और राज्यों की ओर से मांगे जा रहे राहत पैकेज (Relief Fund) पर चर्चा की जा रही है.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा कि कोविड के साथ लड़ाई में बुजुर्गों, डायबिटिक और हार्ट मरीजों को बचाना अहम है. वहीं, पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि राज्यों के सामने वित्तीय संकट गहराता जा रहा है, केंद्र सरकार की ओर से कोई धन आवंटित नहीं किया जा रहा है.

बैठक में राजस्थान, पंजाब, छत्तीसगढ़ और पुदुचेरी के मुख्यमंत्रियों ने केंद्र से राहत पैकेज की मांग की है. राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत, पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल और पुदुचेरी के सीएम नारायणसामी ने राहत पैकेज की मांग की है.

वहीं, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, ‘जब तक व्यापक प्रोत्साहन पैकेज नहीं दिया जाता, तबतक राज्य और देश कैसे चलेंगे? हमने 10 हजार करोड़ का राजस्व खो दिया है. राज्यों ने पैकेज के लिए बार-बार प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है लेकिन हमारी बात को अनसुना कर दिया गया है.

इस पर पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा, ‘जैसा की सोनिया जी कह रही हैं कि लॉकडाउन 3.0 के बाद क्या? हम भी जानना चाहते हैं कि सरकार के पास आगे का क्या प्लान है. राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लॉकडाउन के तीसरे चरण के बाद की रणनीति पता होनी चाहिए.’

पंजाब के मुख्यमंत्र कैप्टन अमरिंदर सिंह ने लॉकडाउन पर केंद्र के दृष्टिकोण की आलोचना की. उन्होंने कहा कि हमने दो समितियों का गठन किया है, एक लॉकडाउन के एग्जिट प्लान के लिए और दूसरी आर्थिक पुनरुद्धार के बारे में रणनीति बनाने के लिए. दिल्ली के लोग बैठकर बगैर जाने जोनों के वर्गीकरण का फैसला कर रहे हैं.

छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं. उन्हें तत्काल सहायता प्रदान करने की आवश्यकता है. छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है, जहां 80 फीसदी लघु उद्योग फिर से शुरू हो गए हैं और लगभग 85,000 श्रमिक काम पर लौट आए हैं.

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