बीते दिनों फेसबुक पर आरोप लगा था कि फेसबुक नियम लागू करने में पक्षपात करती है, हेट स्पीच पर कार्रवाई नहीं करती जिस पर फेसबुक इंडिया की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर अंखी दास भी विवादों में घिर गई थी। बीजेपी के कुछ नेताओं की ऐसी पोस्ट हटाने से मना कर दिया था, जो कि घृणा फैलाने वाली थी।

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अमेरिकन की द वॉल स्ट्रीट जर्नल में भी मामले पर रिपोर्ट छपी थी, और इस पर बीजेपी को भी खूब आलोचना झेलनी पड़ी थी। आरोप था, कि बीजेपी अपने प्रचार प्रसार के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रही है, बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

एक बार फिर बीजेपी पर झूठी खबरें फैलाने का आरोप है, और फेसबुक भी साथ है, और फेसबुक एक बार फिर से सवालों के घेरे में है। दरअसल फेसबुक के फैक्ट चैकिंग साझेदारों पर अल्ट न्यूज़ ने दावा किया है कि वह अपना काम ठीक से नहीं कर रही है। बीते साल की रिपोर्ट के अनुसार फैक्ट चेकिंग साझेदारों ने अगस्त 2019 से अगस्त 2020 के बीच किसी भी गुमराह करने वाली पोस्ट या किसी व्यक्ति को या संगत को हाईलाइट नहीं किया है। और ना ही किसी आपत्तिजनक पोस्ट पर कोई कार्रवाई की है।

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वाल स्ट्रीट के एक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि फेसबुक प्रधानमंत्री मोदी का समर्थन करती है और हिंदू राष्ट्र वादियों के खिलाफ एक्शन लेने से बच रही है। तो वहीं एक रिपोर्ट में लिखा गया है कि फेसबुक पर मौजूद फर्जी अकाउंट दुनिया भर में चुनाव और राजनीतिक प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है। लेकिन सबूतों के बावजूद सोशल मीडिया कंपनियों पर कार्रवाई करने से बच रही है।

ग़ौरतलब है कि बीते लोकसभा चुनाव से पहले फेसबुक ने कई फर्जी और गुमराह करने वाले कंटेंट और अकाउंट पर कार्रवाई करते हुए हजार से ज्यादा पेज बंद किए थे। इनमें कांग्रेस का पेज बीजेपी की मुखालफत करने वाले को शामिल थे। हालांकि इसमें एक भी पेज बीजेपी से जुड़ा हुआ नहीं था।

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यानी फेसबुक गलत जानकारी फैलाने का काम तो कर ही रहा था। और साथ ही साथ विपक्ष की आवाज भी दबाने की कोशिश कर रहा था। यह सारी बातें इस ओर इशारा करती है, कि बीजेपी हर हाल में सत्ता में बने रहने के लिए कुछ भी कर सकती है। वो रास्ता चाहे नैतिक हो या अनैतिक ।