Haryana: लॉक डाउन में छिना रोजगार पहले घर चलाने के लिए बेचा फोन फिर युवक ने कर ली आत्महत्या

आप कोरोनावायरस से बच सकते हैं लेकिन भूख से नहीं जी हां कोरोनावायरस के चलते पूरे भारत में 13 मई तक Lock डाउन है जिसके कारण कई लोगों का रोजगार बंद हो चुका है पहले Lock डाउन की घोषणा के बाद दिल्ली में और दूसरे Lock डाउन की घोषणा के बाद मुंबई में दिहाड़ी मजदूर और गरीब तबके के लोग सड़कों पर आ गए| वजह थी भूख क्योंकि बिना रोजगार रोजाना 100- ₹200 कमाने वाला गरीब कब तक बड़े शहरों में घर में बंद होकर रह सकता है| दिल्ली से सटे गुरुग्राम में शनिवार को एक ऐसा ही मामला सामने आया जहां पैसे से पेंटर एक शख्स ने भूख और बेरोजगारी से परेशान होकर अपनी जीवन लीला ही समाप्त कर दी|

आत्महत्या करने से 2 दिन पहले युवक ने अपना मोबाइल बेचा था कोरोनावायरस से लड़ाई के बीच भूख की तड़प और परिवार के लाचारी ने सबको इतना परेशान किया कि उससे अपना 12000 का मोबाइल महज ढाई हजार रुपे में बेचना पड़ा पेट की ही मजबूरी थी इस पैसे से उन्होंने अपने 4 बच्चे और पत्नी के लिए खाना खरीदा इन दिनों छोटे से घर में 4 बच्चों और पत्नी के साथ दोपहर बिताना असहनीय हो रहा था इसलिए टेबल पंखा भी खरीदा लेकिन उस ढाई हजार से वह अपने लिए सिर्फ 2 दिन की जिंदगी खरीद सका लाचार होकर आत्महत्या कर ली|

मुकेश अपने परिवार के साथ गुरुग्राम में सरस्वती कुंज डीएलएफ Phase 5 के झुग्गियों में रहता था लॉक डाउन की वजह से मुकेश की जमा पूंजी खत्म हो गई थी हालात इतने खराब थे कि उनके पास खाने तक के लिए पैसे नहीं थे Lock डाउन की वजह से रोजगार भी नहीं बचा ऐसे में वह अपने बीवी बच्चों को खाना कहां से खिलाए यह सोच सोच कर परेशान हुआ जा रहा था हालांकि मुकेश ने कुछ दिनों तक दोस्तों से भी पैसा मांगा लेकिन जब कोई रास्ता नहीं सूझा तो मुकेश ने अपनी अपना मोबाइल बेच दिया इस पैसे से उसने परिवार के लिए कुछ राशन खरीदे साथ एक टेबल पंखा भी क्योंकि छोटे थे घर में इन दिनों गर्मी की वजह से रहना मुश्किल हो गया था|

पैसे खत्म हो जाने के बाद 2 दिनों के बाद फिर से खाने का संकट सामने आ गया क्योंकि घर में 5 और लोग भी रह रहे हैं मुकेश को कुछ समझ नहीं आया तो परेशान होकर घर में ही फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली मुकेश की पत्नी पूनम ने बताया कि उसके पास पति के अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं थे लिहाजा पड़ोसियों ने चंदा जमा करके मुकेश का अंतिम संस्कार किया मुकेश की मौत ने सरकार के उस दावे की पोल खोल दी है जाहिर है सभी राज्य सरकार दावा कर रही है कि उनके यहां गरीबों के रहने और खाने की कोई दिक्कत नहीं है यहां तक कि बिहार सरकार ने दूसरों राज्यों से यह अपील की थी कि उनके नागरिकों के खाने के लिए सभी जरूरी सामान मुहैया कराए जा और इसके बदले में वह संबंधित राज्यों को फंड जारी करेंगे|

यह सिर्फ मुकेश की ही नहीं बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिन्हें इस लॉक डाउन की वजह से एक वक्त का खाना तक नसीब नहीं हो पा रहा है आप कोरोनावायरस से बच सकते हैं लेकिन भूख की तड़प से नहीं|

Newspolitics.in की टीम आपसे गुजारिश करती है कि अगर आपके आसपास कोई ऐसा दिखे तो आप उनकी मदद जरूर करें यही मानवता है और यही धर्म है|

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