Lockdown ने छीनी नौकरी लेकिन फिर भी नहीं टूटी हिम्मत, फल-सब्जी बेचकर गुज़ारा कर रहा ग्रेजुएट

देशभर में लॉकडाउन के चलते लाखों लोगों की नौकरियों चली गई हैं. दिल्ली-NCR में ऐसे हजारों बेरोजगार हैं जो अब गुजारा करने के लिए सब्जी और फल बेच रहे हैं. 35 साल की रुखसार गाजियाबाद के वैशाली इलाके के जिन अपार्टमेंट्स में खाना बनाती थीं, अब उन्हीं के बाहर सब्जी बेच रही हैं. पहले महीने के 11,000 रुपये कमाती थीं लेकिन अब अपार्टमेंट वाले न ही काम के लिए बुला रहे हैं और न ही पैसे दे रहे हैं. रुखसार कहती हैं कि सरकारी राशन के लिए घंटों लाइन में लगने से अच्छा है, मेहनत करके सब्जी बेच लो और इज्जत के साथ रहो.

रुखसार के चार बच्चे हैं और वह चारों को मेहनत कर अंग्रेजी स्कूल में पढ़ा रही हैं. दक्षिणी दिल्ली के मूलचंद इलाके में हमारी मुलाकात फैजान से हुई. फैजान ग्रेजुएट हैं. लॉकडाउन से पहले डीएलएफ साइबर हब मॉल में गार्ड थे. 16000 रुपये वेतन था लेकिन मॉल बंद है और वेतन नहीं मिल रहा. अपने भाई से 5000 रुपये उधार मांग कर ओखला मंडी से आम और तरबूज थोक में खरीद कर लाए हैं और अब फुटकर में मूलचंद हॉस्पिटल के सामने ठेला लगाकर बेच रहे हैं.

फैजान बताते हैं कि सरकार से दो वक्त का खाना तो मिल जाएगा, पर कमरे का किराया और बच्चों की फीस और किताबों का भी खर्च होता है. दिल्ली में रहने वाले सभी लोगों ने मूलचंद के पराठे जरूर खाए होंगे पर सोचिए हालात इस कदर खराब हो गए हैं कि मूलचंद पर पराठे बनाने वाले मुख्य बावर्ची सीताराम भी हमें ग्रेटर कैलाश में ठेला लगाकर आम बेचते हुए मिल गए. सीताराम को 10000 रुपये मिलते थे लेकिन लॉकडाउन में सब बंद तो वेतन भी बंद. जो जमा पूंजी थी उससे फल ले आए ठेला लगाकर बेच रहे हैं.

फैजान बताते हैं कि सरकार से दो वक्त का खाना तो मिल जाएगा, पर कमरे का किराया और बच्चों की फीस और किताबों का भी खर्च होता है. दिल्ली में रहने वाले सभी लोगों ने मूलचंद के पराठे जरूर खाए होंगे पर सोचिए हालात इस कदर खराब हो गए हैं कि मूलचंद पर पराठे बनाने वाले मुख्य बावर्ची सीताराम भी हमें ग्रेटर कैलाश में ठेला लगाकर आम बेचते हुए मिल गए. सीताराम को 10000 रुपये मिलते थे लेकिन लॉकडाउन में सब बंद तो वेतन भी बंद. जो जमा पूंजी थी उससे फल ले आए ठेला लगाकर बेच रहे हैं.

देश की राजधानी दिल्ली के हर चौराहे नुक्कड़ पर आपको ऐसे हजारों सब्जी और फल के ठेले मिल जाएंगे, जहां ये बेरोजगार कड़ी धूप और गर्मी में अपना पेट पालने के लिए आवाज लगाते मिल जाएंगे. आसपास के इलाकों में हजारों हैं, जो सरकार पर निर्भर न रहकर ऐसे सब्जी-फल बेच रहे हैं क्योंकि लॉकडाउन में फल और सब्जी बेचने पर कोई रोक नहीं है.

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