सैटेलाइट बनाने में निजीकरण का विरोध करने पर इसरो ने वैज्ञानिक तपन मिश्रा को हटाया

आज भारत सरकार बैंक से लेकर रेलवे, रेलवे से लेकर कोयला खदानों हर चीज का निजीकरण कर रही है तो आपको याद दिला दूं कि सैटेलाइट बनाने में निजीकरण का विरोध करने पर वैज्ञानिक तपन मिश्रा को हटा दिया गया था.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वरिष्ठ वैज्ञानिक तपन मिश्रा को सैटेलाइट बनाने में निजीकरण का विरोध भारी पड़ गया। इसरो के चेयरमैन के सीवन ने उन्हें अहमदाबाद स्थित स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (एसएसी) के निदेशक पद से हटाकर बंगलूरू स्थित मुख्यालय में बतौर वरिष्ठ सलाहकार नई नियुक्ति का आदेश जारी किया है।

समझा जाता है कि सीवन और मिश्रा के बीच इसरो के विभिन्न क्षेत्रों के कार्यक्रमों में निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका के कारण मतभेद रहे हैं। मिश्रा की जगह एक अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक डीके दास को नियुक्त किया गया है। इसरो चेयरमैन ने यह कार्रवाई 27 सैटेलाइट बनाने के लिए दो निजी कंपनियों और एक सरकारी कंपनी के साथ करार के एक दिन बाद ही की है। 


देश के लिए कुछ अहम सैटेलाइट बनाने के बाद मशहूर हुए मिश्रा भविष्य में इसरो प्रमुख बनने की दौड़ में थे। मसलन, एएस किरण कुमार स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर के प्रमुख बनने के बाद ही इसरो प्रमुख बने थे।

इसी तरह मौजूदा इसरो प्रमुख भी इससे पहले विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के प्रमुख पद पर थे। मिश्रा इसरो कार्यक्रमों के निजीकरण का विरोध करते रहे हैं। उन्होंने जीसैट-11 के प्रक्षेपण में हो रही देरी पर भी चिंता जताई थी, जिसे ‘फ्रेंच गुयाना’ से अप्रैल में वापस बुला लिया गया था।

कौन हैं तपन मिश्रा 
भारत और पड़ोसी देशों पर अंधेरे और बादल घिरे होने के बावजूद नजर रखने वाले रीसैट-1 सहित कई सैटलाइट्स बनाने में मिश्रा ने अहम भूमिका निभाई है।  कोलकाता की जाधवपुर यूनिवर्सिटी से 1884 में इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलिकम्युनिकेशन इंजिनियरिंग से ग्रैजुएट मिश्रा ने एसएसी में 34 वर्षों तक काम किया है। 57 वर्षीय मिश्रा ने 10 दिन तक कोमा में रहने के बाद ब्रेन कैंसर से लड़ाई जीती। अस्पताल से स्वस्थ होने के बाद वह काम पर लौटे और रोज लगातार दस घंटे तक काम करते रहे। 

यह लेख अमर उजाला में दो हजार अट्ठारह को प्रकाशित हुई थी

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