’23 सरकारी कंपनियों को बेचकर आत्मनिर्भर बनेगा भारत, मोदी सरकार की यही तो खूबी है’ : Ravish Kumar

केंद्र की मोदी कैबिनेट ने कंपनियों में सरकारी हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसी कड़ी में सार्वजनिक क्षेत्रों की 23 कंपनियों की सूची तैयार की गयी, जिनकी सरकार हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में हैं और समय का इंतज़ार कर रही है। वित्त मंत्री सिआरामन का कहना है कि कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी को सही कीमत मिलने पर बेचा जाएगा। वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने सरकार की इसी फैसले पर अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट लिख नरेंद्र मोदी सरकार और उसके समर्थकों पर तंज कसा है।

रवीश कुमार ने लिखा- सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में काम करने वालों के लिए यह ख़ुशख़बरी है। उनका प्रदर्शन बेहतर होगा और वे प्राइवेट हो सकेंगे। जिस तरह से रेलवे के निजीकरण की घोषणाओं का स्वागत हुआ है उससे सरकार का मनोबल बढ़ा होगा। रवीश कुमार अपने फेसबुक पोस्ट में आगे लिखते हैं-  मोदी सरकार की यही ख़ूबी है। उनकी समर्थक जनता हर फ़ैसला का समर्थन करती है। वरना 23 सरकारी कंपनियों के विनिवेश का फ़ैसला हंगामा मचा सकता था। अब ऐसी आशंका बीते दिनों की बात हो गई है।

रवीश कुमार ने तंज कसते हुए आगे लिखा- सरकार की दूसरी खूबी है कि अपने फ़ैसले वापस नहीं लेती है। सार्वजनिक क्षेत्र कंपनियों में भी मोदी समर्थक कम नहीं होंगे। वे ख़ुशी से झूम रहे होंगे। बल्कि समर्थक लोगों को ही इस फ़ैसले के समर्थन में स्वागत मार्च निकालना चाहिए ताकि एक संदेश जाए कि ये वो जनता नहीं है जो सरकार के फ़ैसले पर संदेह करती थी। जिन सरकारी कर्मचारियों ने भक्ति में छह साल गुज़ारे हैं उनकी प्रार्थना अब सुनी गई है। उनके ईष्ट की निगाह अब पड़ी है। सरकारी कंपनी बेचने का फ़ैसला वाक़ई गुलाब की खुशबू की तरह है। कंपनियों को बेचने में मोदी सरकार से देर हो गई। वरना यहां काम करने वाले समर्थकों को भक्ति का और समय मिल गया होता। बहुत पहले नौकरी से मुक्ति मिल गई होती।

सरकार की आलोचनका करने वालों औऱ विपक्ष पर चुटकी लेते हुए रवीश कुमार ने लिखा- आलोचकों को भी अपना नज़रिया बदलने की ज़रूरत है। रही बात विपक्षी दलों के विरोध की तो उन्हें सुनता कौन है। जिन कर्मचारियों के लिए बोलेंगे वही उनका साथ नहीं देंगे। अत: विपक्ष को सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। कर्मचारियों की तरह सरकार के फ़ैसले का स्वागत करना चाहिए। वैसे भी मंदिर के शिलान्यास के बाद विपक्षी दलों का रहा सहा जन समर्थन चला जाएगा। अब वे निजीकरण का विरोध करेंगे तो ज़ीरो हो जाएगा। मेरी राय में उन्हें जनता के बीच वोट प्राप्त किए बग़ैर रहना है तो निजीकरण का स्वागत करें।

अपनी पोस्ट के अंत में रवीश ने लिखा- आत्मनिर्भर भारत बनने वाला है। प्राइवेट सेक्टर के विस्तार से आत्मनिर्भर बनेगा। इसलिए सरकारी कंपनी बेची जा रही है ताकि दूसरे भारतीयों को इन्हें चला कर आत्मनिर्भर होने का मौक़ा मिल सके।

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