घुटनों के बल गुजरात मॉडल, प्रवासी मजदूर कर रहे हैं आत्महत्या खाने की कमी

सूरत जो कि गुजरात में स्थित है सूरत को तो अक्सर हम देश के टेक्सटाइल हरिया भारत के सिल्क सिटी के रूप में जानते हैं यहां पर बिहार, उत्तर प्रदेश, बंगाल, उड़ीसा और कई अन्य राज्यों से मजदूर अपनी रोजी रोटी कमाने के लिए आते हैं| लेकिन Lock डाउन होने की वजह से इन मजदूरों की रोजी-रोटी तो गई ही है और साथ ही साथ वह घर लौटने बीच में भी असमर्थ है गर्मी के दिनों में यह लोग एक छोटे से कमरे में अपना जीवन जीने के लिए विवश है और खाने की समस्या लगातार बनी हुई है लोग डाउन की वजह से वह अपने कमरों से बाहर भी नहीं जा सकते रूप पैसे और खाने के अभाव में इस संकट के बीच इन मजदूरों के सारी आशाएं ओझल होती नजर आ रही है इसके चलते उनको बार-बार सड़कों पर आना पड़ रहा है|

गुजरात के एक स्थानीय अखबार गुजरात समाचार में 18 अप्रैल को छपी एक खबर के मुताबिक सूरत में 2 प्रवासी श्रमिकों ने आत्महत्या कर ली इनमें से 12 साल के सुनील राय साहब चौहान उत्तर प्रदेश के जौनपुर के रहने वाले हैं वहीं दूसरी दूसरे प्रवीण बाबू लाल कलाल जिनकी उम्र 20 वर्ष थी जो कि छत्तीसगढ़ के राजसमंद के देवगढ़ के निवासी हैं अखबार के मुताबिक लोग डाउन के चलते काम ना होने और अपने घर लौटने में असमर्थ होने के दबाव में इन दो मजदूरों ने आत्महत्या कर ली|

देशभर में Lock डाउन में फंसे मजदूरों की हालत का अंदाजा हमें एक गैर सरकारी संगठन स्टैंडर्ड वर्कर्स एक्शन नेटवर्क (SWAN) द्वारा किए गए एक सर्वे से मिलता है यह सर्वे लॉक डाउन का प्रथम चरण की अवधि यानी 25 मार्च से 14 अप्रैल के मध्य 11159 प्रवासी मजदूरों पर किया गया था 15 अप्रैल को जारी की गई इस रिपोर्ट में कहा गया कि लोग डाउन की प्रथम चरण की अवधि में 89 फ़ीसदी प्रवासी मजदूरों को उनके एंप्लॉय ने वेतन का भुगतान नहीं किया जबकि 96% सरकारी राशन से भी महरूम है|

सर्वे के अनुसार 11000 प्रवासी मजदूरों में से केवल 51 फ़ीसदी के पास 1 दिन से कम का राशन बचा है जबकि 72 फ़ीसदी का कहना है कि उनका राशन 2 दिन में खत्म हो जाएगा रिपोर्ट में कहा गया है कि रुपया और खाने के अभाव में कुछ कामगार कम खाना खा रहे हैं जबकि कुछ कामगार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं इस सर्वे में शामिल होने वाले लोगों में से हुए लोग हैं जो शारीरिक और मानसिक रूप से कष्ट झेल रहे हैं और अब उन्हें घर जाने को लेकर निराशा आ गई है|

वही एक तरफ जहां देश में राजस्थान का भीलवाड़ा मॉडल और केरल मॉडल को रोना से लड़ाई लड़ने के लिए उदाहरण बने हुए हैं तो वहीं दूसरी तरफ गुजरात मॉडल घुटनों के बल खड़ा हुआ दिखाई दे रहा है जब देशभर में स्थिति भयावह है तो हमें विकास के उस मॉडल पर सवाल उठाना होगा जिससे हमने चुना है और जिसने हमें संकट के समय छोड़ दिया है|

इसे लेकर कांग्रेस के ट्विटर हैंडल ने भी गुजरात सरकार पर सवाल खड़ा किया है

आपको बता दें कि कोरोना संक्रमण भारत में इस कदर फैल चुका है कि कोरोना से अब तक 18,000 से ज्यादा लोग इस संक्रमण का शिकार हो चुके हैं जिनमें से 590 लोगों की मौत हो चुकी है वहीं 3200 लोग स्वस्थ होकर अपने घर जा चुके हैं वहीं अगर गुजरात की बात करें तो गुजरात में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है आंकड़ा 1900 उन्नीस सौ के उन्नीस सौ तक पहुंच गया है|

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