मोदी 2.0 : देश बिकने नहीं दूंगा, अब 28 कंपनियां बेचेगी मोदी सरकार

भारत का राजकोषीय घाटा 6.45 लाख करोड़ रुपए का है. इसका मतलब ख़र्चा बहुत ज़्यादा और कमाई कम. ख़र्च और कमाई में 6.45 लाख करोड़ का अंतर.
तो इससे निपटने के लिए सरकार अपनी कंपनियों का निजीकरण और विनिवेश करके पैसे जुटाती है.

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला साल पूरा हो गया है तो भाजपा नेता मोदी सरकार के कामकाज के तारीफ तारीफ करते नजर आ रहे हैं आइए डालते हैं कुछ नजर इन खबरों पर

Disinvestment मोदी सरकार कुल 28 सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पीएसयू) में हिस्सेदारी बेचने में जुटी है. वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने इन कंपनियों का पूरा ब्योरा बताया है. वर्ष 2019-20 के दौरान सरकार ने विनिवेश से 65,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा था.

मोदी सरकार देश में इस वक्त कुल 28 सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पीएसयू) में हिस्सेदारी बेचने में जुटी है. सरकार ने इन कंपनियों में विनिवेश यानी हिस्सेदारी बेचने को लेकर सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है

, तमिलनाडु के डीएमके सांसद पी वेलुसामी ने वित्त मंत्री से घाटे में चल रहीं उन कंपनियों का ब्योरा मांगा था, जिन्हें हिस्सेदारी बेचने के लिए चिह्नि‍त किया गया है.

वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने लिखित जवाब में 28 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के नाम भी बताए, जिनमें विनिवेश यानी हिस्सेदारी बेचने की सैद्धांतिक मंजूरी मिली है. ये कंपनियां हैं-

1- स्कूटर्स इंडिया लि.,
2- ब्रिज ऐंड रूफ कंपनी इंडिया लि,
3- हिंदुस्तान न्यूज प्रिंट लि.,
4- भारत पंप्स ऐंड कम्प्रेसर्स लि,
5- सीमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लि.,
6- सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लि,
7- भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड,
8- फेरो स्क्रैप निगम
9- पवन हंस लिमिटेड,
10- एअर इंडिया और उसकी पांच सहायक कंपनियां और एक संयुक्त उद्यम,
11- एचएलएल लाइफकेयर,
12- हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स लि.,
13- शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया,
14- बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड.
15- नीलांचल इस्पात निगम लिमिडेट में विनिवेश की सैद्धांतिक मंजूरी बीते आठ जनवरी को दी गई.
16- हिंदुस्तान प्रीफैबलिमिटेड (HPL),
17 – इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स इंडिया लिमिटेड,
18- भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन
19- कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CONCOR)
20- एनएमडीसी का नागरनकर स्टील प्लांट,
21- सेल का दुर्गापुर अलॉय स्टील प्लांट, सलेम स्टील प्लांट और भद्रावती यूनिट.
22- टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड (THDCIL)
23- इंडियन मेडिसीन ऐंड फार्मास्यूटिकल्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (IMPCL),
24- कर्नाटक एंटीबायोटिक्स,
25-इंडियन टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (ITDC) की कई ईकाइयां
26- नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (NEEPCO)
27- प्रोजेक्ट ऐंड डेवलपमेंट इंडिया लि.
28- कामरजार पोर्ट

क्या है कंपनियों का हिस्सा बेचने का आधार


वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने लिखित जवाब में बताया कि सरकार हानि और लाभ के आधार पर विनिवेश का फैसला नहीं करती बल्कि उन सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में विनिवेश का फैसला करती है जो प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में नहीं हैं.

न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि वर्ष 2019-20 के दौरान सरकार ने विनिवेश के लिए 65,000 करोड़ का लक्ष्य रखा. इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सरकार रणनीतिक बिक्री के साथ हिस्सेदारी बेचने आदि प्रक्रियाओं का सहारा लेती है.

पिछली बार एनडीए सरकार ने 1999 से 2004 के बीच भी राजकोषीय घाटा कम करने के लिए विनिवेश का तरीका अपनाया था. तब इसके लिए एक अलग मंत्रालय बनाया गया था.

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