शहरों का डाटा तो मौजूद, लेकिन गांवों का कोई आंकड़ा नहीं, क्या वाकई घट रहा कोरोना का कहर?

देश में पिछले करीब सात दिनों से कोरोना मरीजों की संख्या में गिरावट जारी है। इसके इतर गांव में कोरोना संक्रमण का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में यकीन करना बेहद मुश्किल है कि कोरोना की दूसरी लहर की रफ्तार वास्तव में थम रही है।


देश में कोरोना का कहर कम हो रहा है। लगातार दूसरे दिन नए संक्रमितों की संख्या 3 लाख से नीचे रही। इन सरकारी आंकड़ों ने राहत तो दी है, लेकिन रोजाना चार हजार से ज्यादा मौतें इस पर लीपापोती कर रही हैं।

आईसीएमआर देशभर में औसतन 17 लाख जांच का दावा कर रहा है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि जांच का तरीका कौन-सा (आरटी-पीसीआर, एंटीजन रैपिड टेस्ट और सीटी स्कैन) है? अहम बात यह है कि सरकारी आंकड़ा ज्यादातर शहरी इलाकों का है। इसके इतर गांवों में स्थिति काफी बदहाल है। वहां न तो जांच केंद्र बने हैं और न ही टीकाकरण की कोई सुविधा नहीं है। क्या इतनी बदहाली के बावजूद कोरोना का कहर खुद-ब-खुद कम हो रहा है? क्या है देश के अलग-अलग इलाकों के हालात, जानते हैं इस ग्राउंड रिपोर्ट में…

राजधानी के गांव बदहाल तो बाकी का क्या?
बिहार की राजधानी पटना के दो गांव नेमा और पोथाही कोरोना से लड़ने के लिए अब तक तैयार नहीं हैं। यहां न तो कोरोना जांच की सहूलियत उपलब्ध है और न ही गांव वालों को टीकाकरण के बारे में कोई भी जानकारी है। गांव के लोगों का कहना है कि यहां लोगों की जुबां पर कोरोना का नाम तो है, लेकिन उससे निपटने-जूझने और बचने का तरीका बताने-समझाने का वाला कोई नहीं है। जब राजधानी पटना के गांवों नेमा और पोथाही का ऐसा हाल है तो बाकी जिलों के गांवों के हालात का अंदाजा खुद-ब-खुद लगाया जा सकता है।


900 की आबादी, सैंपल सिर्फ 25 का…

कोरोना वायरस के 16 मई 2021 तक के आंकड़े

यूपी के कई गांवों में कोरोना जांच का तरीका एकदम अलहदा है। आजमगढ़, जौनपुर, बनारस, सुल्तानपुर और प्रतापगढ़ समेत कई जिलों के गांवों में कोरोना जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। जौनपुर के गांव खालिसपुर में करीब 900 लोग रहते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि कोरोना की जांच करने के लिए डॉक्टर साहब आए तो 200 से ज्यादा लोगों ने उन्हें घेर लिया। हालांकि, डॉक्टर साहब के पास महज 25 लोगों की जांच के साधन ही मौजूद थे। वह महज 30 मिनट में अपने काम से फारिग हुए और सर्दी-जुकाम से जूझ रहे बाकी लोगों को उनकी हालत पर छोड़कर चले गए।


सांसद का गांव भी बेहाल
केंद्रीय राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह का गांव बापोड़ा है, जो हरियाणा के भिवानी जिले में आता है। यहां फिलहाल 30 लोग कोरोना संक्रमित हैं। पिछले 15 दिन के दौरान गांव के 25 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जिनमें चार लोगों की मौत कोरोना से होने की पुष्टि की गई। हालात को देखते हुए गांव में आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है, लेकिन वहां न तो एंबुलेंस है और न ही ऑक्सीजन की सुविधा। यह सेंटर चंद दवाओं और 10 बेड के भरोसे है। हालात इतने ज्यादा खराब हैं कि जिस कमरे में बेड रखे हैं, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी उस पर ताला लगाकर अपने घर चला जाता है।


नदियों किनारे पड़े शव भी उठा रहे सवाल
गांवों के हालात देश में कोरोना को लेकर किए जा रहे फीलगुड के आंकड़ों की पोल खोल रहे हैं। इनके अलावा नदियों में लगातार मिल रहे शव भी सवाल उठा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स पर गौर करें तो यूपी और बिहार में नदियों के आसपास अब तक दो हजार से ज्यादा ऐसे शव मिल चुके हैं, जिनका पोस्टमॉर्टम तक नहीं हुआ। अंतिम विदाई के नाम पर उन्हें नदियों के किनारे ही मिट्टी में दबा दिया गया। यह तक पता नहीं चल पाया कि उनकी मौत कोरोना से हुई या इसकी वजह भी कुछ और थी।

क्या है 17 लाख जांच का सच?
गौरतलब है कि ग्रामीण इलाकों में कोरोना संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। केंद्र ने कहा है कि राज्य सरकारें अब ग्राउंड लेवल के स्टाफ को रैपिड एंटीजन टेस्टिंग की ट्रेनिंग दें, जिससे अंदरूनी इलाकों में अधिक से अधिक टेस्टिंग की जा सके।

वहीं, आईसीएमआर ने दावा किया है कि वह देशभर में रोजाना 17 लाख से ज्यादा जांच कर रहा है। हालांकि, इसमें यह नहीं बताया गया है कि इन जांचों में आरटी-पीसीआर पर ज्यादा भरोसा किया जा रहा है या एंटीजन रैपिड टेस्ट पर। गौरतलब है कि आईसीएमआर ने कोरोना की पहली लहर के दौरान 70 फीसदी सैंपल की जांच आरटी-पीसीआर से करने के निर्देश दिए थे, लेकिन दूसरी लहर में एंटीजन टेस्ट बढ़ाने की गाइडलाइन जारी की। ऐसे में माना जा रहा है कि इन 17 लाख जांच में एंटीजन रैपिड टेस्ट से जुटाया डाटा ज्यादा हो सकता है।


सवालों के घेरे में एंटीजन टेस्ट की प्रमाणिकता

कोरोना वायरस के 16 मई 2021 तक के आंकड़े
रैपिड एंटीजन टेस्ट (रैट)- इस जांच में कोरोना की रिपोर्ट तुरंत मिल जाती है, लेकिन इसकी प्रामाणिकता हमेशा सवालों में रही है। देश में सबसे प्रामाणिक आरटी पीसीआर कोरोना जांच में 10 में से 4 सैंपल संक्रमित मिलते हैं। वहीं, एंटीजन में सिर्फ एक ही पॉजिटिव मिल रहा है। बता दें कि एंटीजन टेस्ट में निगेटिव आने के बाद भी लोगों में कोरोना के हल्के लक्षण मिल रहे हैं। ऐसे में लोग संक्रमण को पुख्ता करने के लिए एक्स-रे और सीटी स्कैन भी करा रहे हैं।


देश में ऐसा है कोरोना का हाल
बता दें कि सरकारी आंकड़ों के हिसाब से देश में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार घट रहे हैं। ऐसे में केंद्र व राज्य सरकारें कोरोना की दूसरी पीक गुजर जाने का दावा कर रही हैं। हालांकि, विशेषज्ञ अब भी लापरवाही नहीं बरतने की सलाह दे रहे हैं। पिछले 24 घंटे के दौरान देश में 2.6 लाख नए संक्रमित मिले, जबकि 3719 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। गौरतलब है कि यह लगातार दूसरा दिन है, जब देश में 3 लाख से कम नए मामले मिले हैं। इससे पहले रविवार (16 मई) को 2.81 लाख नए संक्रमित मिले थे और 4106 लोगों की मौत हुई थी

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