केंद्र ने खड़े किए हाथ, कहा- राज्यों को GST में उनका हिस्सा देने की हालत नहीं

कोरोना काल है. सरकारों के पास पैसों की कमी की खबरें हैं. इस बीच वित्त सचिव अजय भूषण पांडे ने कहा है कि केंद्र सरकार राज्यों को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) में उनके हिस्से का पैसा देने की हालत में नहीं है. पांडे ने ये बात वित्त मामलों की संसदीय समिति के सामने कही है. ‘द हिंदू’ ने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है. खबर में बताया गया है कि संसदीय समिति की बैठक 28 जुलाई को हुई थी. बीजेपी सांसद जयंत सिन्हा इस समिति के मुखिया हैं.

‘द हिंदू’ ने बैठक में शामिल हुए दो सदस्यों के हवाले से लिखा कि पांडे से कोरोना महामारी के चलते खजाने में आई कमी के बारे में पूछा गया था. जवाब मिला कि अभी जो जीएसटी की कमाई बांटने का फॉर्मूला है, उसके अनुसार तो केंद्र राज्यों को पैसा नहीं दे सकता. इस पर संसदीय समिति के सदस्यों ने पांडे से पूछा कि केंद्र सरकार राज्यों से किए अपना वादों से कैसे मुकर सकती है?

इस पर वित्त सचिव का जवाब था कि अगर टैक्स कलेक्शन एक निश्चित सीमा से कम होता है तो जीएसटी एक्ट में राज्यों को पैसा देने के फॉर्मूले में बदलाव की व्यवस्था है. यानी टैक्स कलेक्शन कम होने पर राज्यों को मिलने वाले पैसे की हिस्सेदारी में कमी की जा सकती है.

केंद्र ने आखिरी किश्त में 13,806 करोड़ रुपये दिए
27 जुलाई को वित्त मंत्रालय ने कहा था कि केंद्र ने वित्तीय वर्ष 2019-20 की जीएसटी कलेक्शन की आखिरी किश्त जारी कर दी है. इसके जरिए राज्यों को 13,806 करोड़ रुपये जारी किए गए. वैसे जीएसटी काउंसिल की जुलाई में मीटिंग होनी थी. इसमें राज्यों को मिलने वाले पैसे के नए फॉर्मूले पर चर्चा होनी थी. लेकिन यह मीटिंग अभी तक नहीं हुई है.

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