पश्चिम बंगाल में बीजेपी को बड़ा झटका 4 सांसद 1 विधायक और 16 पार्षद तृणमूल Congress में होंगे शामिल ?

विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल बीजेपी (West Bengal BJP) को बड़ा झटका लग सकता है। सूत्रों के मुताबिक, 21 बीजेपी नेता जल्द ही टीएमसी (Trinamool Congress) में वापसी करने वाले हैं। इनमें 4 सांसद और 1 विधायक भी शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल बीजेपी के 21 नेता तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में शामिल हो सकते हैं। इनमें 4 सांसद, 1 विधायक और 16 पार्षद शामिल हैं। सूत्रों कि मानें तो इनमें से अधिकतर टीएमसी से बीजेपी में शामिल हुए थे और अब ये घर वापसी की योजना बना रहे हैं। अगर यह सही है तो यह पश्चिम बंगाल बीजेपी के लिए विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा झटका साबित हो सकती है।


न्यूज चैनल टाइम्स नाउ के मुताबिक, आने वाले दिनों में 21 बीजेपी नेता टीएमसी में शामिल हो सकते हैं। इनमें 4 सांसदों में से तीन ऐसे सांसद हैं जिन्होंने पिछले साल लोकसभा चुनाव से ठीक पहले या बाद में बीजेपी का दामन थामा था। इसके अलावा एक विधायक भी टीएमसी में घर वापसी की चाह में हैं।

टीएमसी नेताओं से मुलाकात कर रहे बीजेपी सांसद
सूत्रों के मुताबिक, एक बीजेपी सांसद, जो दो बार सांसद रह चुके हैं और पश्चिम बंगाल से बताए जा रहे हैं। वह भी पिछले तीन महीनों से दिल्ली में टीएमसी नेताओं से संपर्क बनाए हुए हैं और टीएमसी में शामिल होने की इच्छा जता चुके हैं।

मुकुल रॉय और दिलीप घोष के बीच तनातनी है वजह
बीजेपी नेताओं के टीएमसी में शामिल होने की खबरों से प्रदेश कमान पर सवाल उठ रहे हैं। बता दें कि मुकुल रॉय और पश्चिम बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप घोष के बीच तनातनी जाहिर है। इसी साल दिलीप घोष को पार्टी ने दोबारा अध्यक्ष बनाया जिससे टीएमसी से बीजेपी में आए मुकुल रॉय और उनके समर्थक नाराज थे। उनके बीजेपी छोड़ने की भी चर्चा थी।

दो दिन पहले मुकुल रॉय ने दिया था यह बयान
हालांकि दो दिन पहले ही मुकुल रॉय ने ऐलान किया कि वह कहीं नहीं जा रहे हैं और बीजेपी में ही रहेंगे। उन्होंने अपने और दिलीप घोष के बीच विवाद को भी महज अफवाह बताया। हालांकि 21 बीजेपी नेताओं के फिर से टीएमसी में जाने की चर्चा से एक बार फिर दोनों के बीच उठापटक सामने आती दिख रही है।

दिलीप घोष के नेतृत्व पर उठ रहे सवाल
पिछले कई दिनों से दिलीप घोष के नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि उनके सभी नेताओं के साथ सामंजस्य नहीं बिठा पा रहे हैं। इसी वजह से राज्य स्तर पर कोई फैसला लेने से पहले सबको विश्वास में नहीं ले पा रहे हैं।

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