बीजेपी शासित हिमाचल प्रदेश में बंदरों को जान से मारने की मिली अनुमति, बंदर मारना अपराध नहीं

केरल में गर्भवती हथिनी (Kerala Pregnant Elephant Death) की मौत पर पूरे देश में लोगों का गुस्सा फूटा है. सोशल मीडिया (Social Media) में इसे लेकर लोग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. साथ ही इस कृत्य को अंजाम देने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. लेकिन इस बीच बड़ा सवाल यह है कि हिमाचल प्रदेश (Himachal) में हथिनी की मौत पर लोग ‘आंसू’ बहाने वाले लोग बंदरों को मारने की इजाजत का विरोध क्यों नहीं करते हैं? क्यों हिमाचल (Himachal) के लोग बंदरों और अन्य जंगली जानवरों का शिकार (Hunting) करते हैं और बंदूक के साथ अपनी ‘मर्दानगी’ और शौर्य’ की फोटो सोशल मीडिया पर डालते हैं.

हिमाचल प्रदेश में बंदरों को मारना अब अपराध नहीं होगा। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने बंदरों को वर्मिन यानी पीड़क जंतु घोषित कर दिया है। प्रदेश की 91 तहसीलों, उपतहसीलों में प्रभावित किसान इन्हें मार सकेंगे। वर्मिन घोषित होने की अवधि एक साल के लिए मान्य रहेगी। इस संबंध में मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की है। वन विभाग ने प्रदेश सरकार के माध्यम से इस मसले के केंद्र के साथ प्रमुखता से उठाया था।

अब किसानों को काफी राहत मिलेगी। बंदरों के उत्पात से खेत बंजर हो गए हैं। किसानों के संगठन खासकर किसान सभा लगातार इस मामले को सरकार और विभाग के समक्ष उठा रही है। बंदरों का मामला संसद से लेकर सड़क तक कई बार गूंज चुका है, पर इसका ठोस समाधान नहीं मिल पाया है। अभी भी बंदरों के निर्यात पर रोक नहीं हट पाई है। हालांकि इससे पहले भी बंदर मारने की अनुमति मिली थी, लेकिन किसानों को राहत नहीं मिली।

साल 2019 में तो शिमला में बदंरों को लोगों ने मारना शुरू कर दिया था. यहां बंदरों को खाने में जहर देने की खबरें और कुछ वीडियो भी सामने आए थे. हाल ही में बीते मई माह शिमला के समीप कुफरी में बंदरों को जहर देकर मारने का मामला सामने आया था. कुफरी के महासू पीक में नौ मरे हुए बंदर मिले थे. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बंदरों के पोस्टमार्टम में इनके जहर देकर मारने की बात सामने आई है। हालांकि किसने इनको जहर दिया है, इसका अभी पता नहीं चल पाया है. वन विभाग ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था.

हिमाचल में सरकार एक बंदर पकड़ने के लिए 1 हजार रुपये भी देती है. प्रदेश में करीब 3 लाख बंदर हैं. बता दें कि हिमाचल में बंदरों की नसबंदी के लिए आठ केंद्र हैं. 2019 तक करीब 1 लाख 57 हजार बंदरों की नसबंदी की गई थी.

-प्रदेश में बंदरों को वर्मिन घोषित कर दिया है। अब एक साल तक इन्हें मारना अपराध नहीं होगा, लेकिन जंगलों में नहीं मारा जा सकेगा। निजी भूमि पर ही मारा जा सकेगा। ये हर साल फसलों को काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं। विभाग किसानों की इस समस्या को सुलझाने के लिए प्रयास कर रहा है।

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