इंडियन इकनॉमी के लिए 2020 डिजास्टर का साल है

2020 इंडियन इकनॉमी के लिए डिजास्टर का साल है यह बात साल 2020 शुरू होने के 4 दिन पहले ही लिख चुका था ओर उसके बाद कम से कम 5 अलग अलग पोस्ट में यही निष्कर्ष निकाले थे…….. जब बार बार यह प्रस्थापना रिपीट कर रहा था तो बहुत से मित्र आकर इस बात की हँसी उड़ा रहे थे, भक्ति भाव मे डूबे हुए लोग आँख होते हुए भी अँधे बन रहे थे……..

सोए हुए मनुष्य को जगाया जा सकता है परन्तु उस जागते हुए मनुष्य को कैसे जगाए जो सोने का अभिनय कर रहा है
कोरोना से बहुत पहले ही आर्थिक मंदी दरवाजे हमारे दस्तक दे रही है और हमारी व्यवस्था भी भक्तों की भांति जागते हुए भी सोते रहने का अभिनय करती रही

आप जानते है कि मार्च 2020 में जीएसटी कलेक्शन कितना हुआ है मात्र 97,597 करोड़ रुपये, ओर जब पहली बार जीएसटी व्यवस्था लागू की गई थी यानी जुलाई साल 2017-18 में तो कितना जीएसटी कलेक्शन हुआ था ये रकम थी 94,063 करोड़ रुपये

आप कहेंगे कि किसी महीने में 1 लाख करोड़ के ऊपर भी हुआ है तो आप ये जानते ही होंगे कि बहुत से महीने ऐसे भी आए है जब कलेक्शन 90 हजार करोड़ के नीचे भी हुआ है यानी हम अभी तक औसतन 94 से 97 हजार करोड़ के बीच ही झूल रहे हैं

खुद सरकार ने 2019-20 वित्त वर्ष के लिए कलेक्शन का लक्ष्य 13.71 लाख करोड़ रुपये रखा था यानी प्रति माह करीब 1.14 लाख करोड़ रुपये कलेक्शन होना चाहिए था लेकिन हुआ है मात्र 11,18,639 करोड़ रुपए

यह इसके पिछले वित्तीय वर्ष 2018-19 में कुल जीएसटी राजस्व संग्रह 10,92,120 करोड़ रुपए से मात्र 26,519 करोड़ रुपए ही ज्यादा है……..

यानी 9 दिन चले अढ़ाई कोस वाली कहावत यहाँ चरितार्थ हो रही है लेकिन फिर भी भक्तों की भक्ति भावना में कोई कमी नही आई है ऐसे ओर दसियों डाटा आपके सामने ओर रख सकता हूँ बहुत सालो से मुख्य रूप से अर्थव्यवस्था पर ही लिख रहा हूँ लेकिन वही बात सामने आ जाती है कि सोने वालों को जगा सकते हो जागते हुए को कैसे जगाओगे………

ओर अब जो दिख रहा है वह तो भयावह है, पहली बार मंदी की आग खाये पिए अघाए मध्यवर्ग को जलाने वाली है अब यह अर्थव्यवस्था नही रही अपितु अनर्थ व्यवस्था बन गयी है

कृष्णकांत

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